Tuesday, February 9, 2010

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EDUCATION ABOUT SUCCESS

Wednesday, January 20, 2010

आप सभी का हार्दिक स्वागत है।

Monday, January 18, 2010

बचत निवेश और आय
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धन प्रबंधन का साधारण विज्ञान

प्रिय दोस्तों,
धन प्रबंधन की दुनिया में आपका स्वागत है।

इस ब्लॉग पर आप धन प्रबंधन की वे बातें जानेंगे जो आपके धन को बचत से निवेश तक ले जाने में आपकी मदद करेंगी।

ये वे बातें हैं जो मैंने धन व निवेश सम्बन्धी बहुत सी पुस्तकें पढ़ कर और बहुत से कोर्स करने के बाद सीखी और जानी हैं। इन बातों को जानने के बाद इनकी सत्यता को जानने के लिए मैंने कुछ प्रयोग भी किये जो कि इन पुस्तकों और कोर्सों में बताये गए थे।

इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अपने अनुभव आप लोगों के साथ साझा करता रहूँगा। उम्मीद करता हूँ कि मेरा ये प्रयास आपको अवश्य पसंद आयेगा।

धन व निवेश से सम्बंधित बातें बताने से पहले मैं आपको अपने बारे में कुछ बताना चाहता हूँ। मेरा जन्म भारत देश के उत्तर प्रदेश राज्य में गाजियाबाद जिले के हापुड़ नामक छोटे से कस्बे में हुआ, पर मेरे सपने बड़े-बड़े थे। इन सपनों को पूरा करने की चाहत मुझे उत्तर प्रदेश से पंजाब ले आयी।

स्कूल के समय से ही मुझे कॉमिक्स और नोवेल पढ़ने का शौक लग चुका था। इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज तक पहुँचते-२ यह भी पता चल चुका था कि जो हम पढ़ रहे हैं वह जीवन में शायद ही काम आये। इस कारण स्कूल और कॉलेज की किताबों के बजाये कॉमिक्स और नोवेल मुझे अधिक आकर्षित करते थे। मैं इस मामले में बहुत भाग्यशाली रहा कि मुझे मेरे माता-पिता ने पढ़ने के मामले में कभी भी रोका या टोका नहीं। इसके अलावा मेरे चचेरे भाइयों ने भी पढ़ने के मामले में मेरी बहुत मदद की। मेरे बड़े चचेरे भाइयों ने मुझे फ़िल्मी मेग्ज़िनों या राजनितिक किताबों से दूर रहने में मेरी सहायता की और मुझे अच्छा साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

पढ़ने और सीखने की मेरी इसी आदत के कारण मैं आज तक अपने परिवार का बेहतरीन तरीके से पालन करता आ रहा हूँ। पढ़ने और सीखने की इस आदत के कारण ही मैंने जीवन, सफलता, कंप्यूटर, ऑफिस की कार्य-शैलियों आदि का गहराई से अध्ययन किया जिस कारण मुझे काम करने के बहुत से अवसर मिलते रहे। अपनी पसंद के अनुसार मैंने विभिन्न तरह के कार्यालयों में कार्य किया। मैं कभी भी कंप्यूटर का न तो अच्छा ज्ञाता था और न ही हूँ, पर फिर भी मुझे कंप्यूटर पर काम करने के लिए उन लोगों से अच्छे पैसे मिले जो कंप्यूटर कोर्स कर चुके थे। न ही मैं अच्छा लेखक हूँ, पर फिर भी लिखने का काम करके मैं अच्छी आय बना लेता। इस सब का श्रेय मैं अपनी पढ़ने की आदत को ही देना चाहता हूँ।

सन २००० तक (जब मेरी उम्र लगभग 28 साल की थी) सब कुछ ठीक चलता रहा, जब तक कि एक दिन मुझे अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए एक साथ बहुत सारे पैसों की ज़रूरत नहीं पढ़ी। ये वो दिन थे जब मुझे अपने जीवन की असली और कठोर सच्चाइयों का सामना करना पड़ा। तब जाकर मुझे ये पता चला कि मुझे जो कुछ भी आता है, वह रोटी खाने तक के लिए तो ठीक है, लेकिन कामयाब होने के लिए मेरा ज्ञान अभी तक शून्य ही है। भले ही मुझे सफलता के बारे में एक साधारण व्यक्ति से अधिक पता था, पर मैं उस साधारण व्यक्ति से अलग नहीं था।

ऐसी स्थिति आने पर मैंने विचार किया कि आखिर मेरी नाकामयाबी का राज़ क्या है? और अगर मुझ जैसे पढ़े-लिखे व्यक्ति का ये हाल है तो एक साधारण व्यक्ति का क्या हाल होता होगा, जो मेरे से भी कम कमाता है? इन सवालों के जवाब खोजने में मेरे परमात्मा ने मेरी बहुत मदद की। मैंने उसी दौरान ये संकल्प लिया कि मैं सफलता सम्बन्धी सम्पूर्ण ज्ञान और शिक्षा की तलाश करूँगा, न केवल अपने लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए जो जीवन में सफल होना चाहता है। भगवान् की कृपा से मुझे सफलता सम्बन्धी महत्वपूर्ण किताबें मिलने लग गयीं।

इन किताबों से मिले ज्ञान को मैंने अपने पहले से मौजूद ज्ञान के साथ मिलाया तो आश्चर्यजनक परिणाम मिले। एक छोटे से कस्बे में गरीब परिवार में जन्म लेने वाले एक साधारण पढ़े-लिखे व्यक्ति के लिए एक बड़ी कंपनी का सी ई ओ बन जाना कोई कम आश्चर्यजनक बात तो नहीं।

सफलता सम्बन्धी बहुत सी पुस्तकों का अध्ययन तथा अभ्यास करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि एक व्यक्ति को जीवन में सफलता हासिल करने के लिए कम से कम चार क्षेत्रों में प्रबंधन कला में माहिर होना पड़ेगा। ये चार क्षेत्र हैं : स्व-प्रबंधन (सेल्फ मैनेजमेंट), धन-प्रबंधन (मनी मैनेजमेंट), समय-प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) तथा जन-प्रबंधन (प्यूपिल मैनेजमेंट)।

इन चारों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है - धन-प्रबंधन। धन सफलता का केंद्र है। प्रत्येक युग में धन ही सफलता का पैमाना रहा है। ऐसा नहीं कि बाकी तीन क्षेत्र सफलता के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं, उपरोक्त चारों क्षेत्र ही सफलता के लिए अत्यंत अनिवार्य हैं, और पूरी तरह से सफल होने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को उपरोक्त चारों क्षेत्रों में ही पारंगत होना पड़ेगा।

हमारा ये ब्लॉग धन सम्बन्धी ज्ञान प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, इसलिए आईये धन के सम्बन्ध में और जानकारी लेते हैं।

धन सम्बन्धी अध्ययन करते हुए मुझे यह पता चला कि दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति धन कमाने की कोई न कोई कला जानता है, परन्तु बहुत कम लोग यह जानते हैं कि धन कमाने के बाद क्या किया जाये? जो लोग यह जान जाते हैं कि धन कमाने के बाद क्या किया जाता है वे लोग ही धन-प्रबंधन में पारंगत हो पाते हैं तथा धनी बन पाते हैं। जो लोग धन कमाने के बाद धन की सही व्यवस्था नहीं बना पाते, वे चाहे जितना भी कमा लें, वे हमेशा खतरे में ही रहते हैं और परिवार में किसी तरह की बड़ी आवश्यकता, जैसे विवाह, जन्म, बीमारी या मौत आदि, के समय पर वे प्राय: उधार के धन से अपना काम चलाते हैं।

जो लोग धन कमाने के बाद धन की सही व्यवस्था करना जान जाते हैं, वे न केवल उधार के दलदल से बाहर आ जाते हैं, बल्कि धीरे-धीरे आर्थिक रूप से मजबूत बनते जाते हैं। धन-प्रबंधन के ज्ञान के बिना एक व्यक्ति धन का मतलब सिर्फ आय ही समझता है। जबकि मेहनत करके कमाए धन को आय कहा जाता है, और इस आय को बचत और निवेश में बदला जाता है।

मैं अभी ये दावा तो नहीं कर सकता कि मैं सफल हो गया हूँ या मेरे पास बहुत सारा धन आ गया है, पर हाँ ये दावा अवश्य कर सकता हूँ कि आने वाले 2 से 3 वर्षों के अन्दर सारा विश्व मेरे बारे में जानने लगेगा, जब मैं स्वयं सफल होकर अन्य लोगों को सफलता के बारे में सिखाने लग जाऊंगा, जो कि मेरा सबसे बड़ा सपना है।

मेरे ऐसा दावा करने के पीछे क्या वजह है? मुझे ऐसा क्यों लगता है कि 2 से 3 वर्षों में मैं सफल होकर सफलता के बारें में सिखाना शुरू कर दूंगा? मैंने किस तरह से अपने आप को धन के सम्बन्ध में शिक्षित किया? धन सम्बन्धी ज्ञान को मैंने किस तरह अपने जीवन में अपनाया और उसका लाभ उठाया? मैंने किस तरह अपनी आय को बचत और निवेश में बदला? इन सब सवालों के जवाब मैं अपने अगले लेख में दूंगा। तब तक के लिए नमस्कार।

आपके सुखद भविष्य की कामना सहित आपका मित्र - विपिन कुमार शर्मा 'सागर'

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